देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने जिस संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिचय दिया, उसे प्रदेश की जनता कभी भुला नहीं सकती। शहीद राज्य आंदोलनकारियों का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
बुधवार को मसूरी स्थित शहीद स्थल झूलाघर में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने मसूरी गोलीकांड में शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान की बदौलत उत्तराखंड राज्य गठन का सपना साकार हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी की धरती राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की महत्वपूर्ण साक्षी रही है। वर्ष 1994 में खटीमा गोलीकांड के विरोध में हजारों आंदोलनकारी मसूरी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारियों के मन में उत्तराखंड की भावी पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की आकांक्षा थी। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के इतिहास और इसमें दिए गए बलिदानों से नई पीढ़ी को परिचित कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन को मजबूती देने में मातृशक्ति की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। प्रदेश की माताओं और बहनों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए संघर्ष को नई ताकत प्रदान की। राज्य आंदोलनकारी उत्तराखंड की पहचान, स्वाभिमान और गौरव के आधार हैं।
देहरादून। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय ले चुकी है। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू है। शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों को मिलने वाली मासिक पेंशन को 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये किया गया है।
इसी प्रकार जेल जाने वाले और घायल आंदोलनकारियों की पेंशन 6 हजार से बढ़ाकर 7 हजार रुपये तथा सक्रिय आंदोलनकारियों की पेंशन 4,500 से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह की गई है। पूर्ण रूप से शय्याग्रस्त दिव्यांग राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन भी 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है। आंदोलनकारियों के अधिकतम दो बच्चों को स्कूल और कॉलेज स्तर पर निशुल्क शिक्षा तथा राज्य परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की अन्य उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून और कठोर भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार दिया गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता और जनसांख्यिकीय स्वरूप की रक्षा के लिए धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून भी लागू किए गए हैं। देवभूमि की शांति, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के खिलाफ सरकार सख्त रुख अपना रही है।
देहरादून। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। साथ ही युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड का कोई युवा रोजगार की तलाश में मजबूरी में पलायन न करे और प्रदेश का कोई गांव विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। देवभूमि की पहचान, संस्कृति और अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राज्य को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, गांवों में सुविधाओं का विस्तार हो और युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलें।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, रविंद्र जुगरान, जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।





















