विधानसभा में बीजेपी की हार ने खोला कल्पना सैनी का रास्ता।

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उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए डॉ कल्पना सैनी का रास्ता 2017 में बीजेपी के हाथ से फिसली 5 विधानसभा सीटों ने खोला। सर्वविदित है कि 2017 की अपेक्षा 2022 में हरिद्वार जनपद से बीजेपी बुरी तरह पिछडी है। 2017 में बीजेपी के पास खानपुर से प्रणव चैंपियन, लक्सर से संजय गुप्ता, हरिद्वार ग्रामीण से यतीश्वरानंद, हरिद्वार से मदन कौशिक, रानीपुर से आदेश चौहान, ज्वालापुर से सुरेश राठौर, रूड़की से प्रदीप बत्रा, झबरेड़ा से देशराज कर्णवाल विधायक थे।

जबकि 2022 में बीजेपी हरिद्वार ग्रामीण, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, ज्वालापुर हार गई। खास बात यह है कि इन क्षेत्रों में सैनी मतदाता भारी संख्या में है हरिद्वार लोकसभा में 2.5 लाख के लगभग सैनी मतदाता को कुछ समय से बीजेपी का वोटर माना जाता रहा है। परन्तु हाल के हुए चुनाव में सैनी मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट दिया। वो बात अलग है कि कांग्रेस के सैनी प्रत्याशी अंतरिक्ष सैनी चुनाव हार गए इसके अलग कारण रहे।

परन्तु 2022 के चुनाव में ज्वालापुर से युवा उम्मीदवार रवि बहादुर, हरिद्वार ग्रामीण से पहली बार चुनावी मैदान में उतरी अनुपमा, खानपुर में निर्दलीय उमेश कुमार, झबरेड़ा में कांग्रेस के वीरेंद्र जाती पर सैनी मतदाताओं ने खूब प्यार लुटाया। कलियर सीट पर बीजेपी ने सैनी उम्मीदवार दिया लेकिन वह बीजेपी नहीं जीत पाया। सैनी समाज की यह संख्या बीजेपी को हरिद्वार लोकसभा सीट हराने के लिए काफ़ी है। किसान आंदोलन का असर इस बिरादरी पर होने से बीजेपी को प्रदेश के मैदानी क्षेत्र में 2024 के लोकसभा सीट बचाने की चिंता है।

2022 के चुनाव में पहाड़ पर महिलाओं ने भी बीजेपी को वोट दिया तो हरिद्वार मैदानी क्षेत्र में महिलाओं ने भी अपना झुकाओं कांग्रेस की तरह दिखाया और बीजेपी की 8 सीट से घट कर मात्र 3 रह गई। सैनी और महिलाओं को साधने के लिए बीजेपी अलाकमान ने एक तीर से दो निशाने साधने का प्रयास किया है इसका कितना फायदा होगा यह 2024 में सामने आयेगा। वैसे कल्पना सैनी का अभी तक का असर कांग्रेस पार्टी के लक्सर उम्मीदवार रहे अंतरिक्ष सैनी जैसा ही है।