हरिद्वार , 23 अगस्त। धर्मनगरी हरिद्वार में रविवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर संत समाज का विशेष समागम आयोजित किया गया। प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम स्थित श्रीजी वाटिका में हुए इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न अखाड़ों, मठों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े संत-महात्माओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और योग गुरु स्वामी रामदेव सहित कई प्रमुख संत एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बार-बार चुनाव से विकास प्रभावित होने का तर्क
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि लगातार चुनावी प्रक्रिया में प्रशासनिक तंत्र और संसाधनों का बड़ा हिस्सा चुनावी तैयारियों में लग जाता है। उनके अनुसार इससे विकास एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यों की गति प्रभावित होती है।
चौहान ने संत समाज से इस विषय पर आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से चुनावी प्रक्रिया में लगने वाले समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीएम धामी ने बताया राष्ट्रीय मुद्दा
हरिद्वार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को सुशासन, जनकल्याण और संसाधनों के प्रभावी उपयोग से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने पर अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिस और अन्य सरकारी कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगती है, जिसका असर सामान्य प्रशासनिक कार्यों पर पड़ सकता है।
धामी के मुताबिक, यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था लागू होती है तो प्रशासन को विकास एवं जनसेवा के कार्यों के लिए अधिक समय मिल सकता है।
‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर भी बयान
समागम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। धामी ने उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और देवी-देवताओं के प्रति आस्था का उल्लेख करते हुए इस मुद्दे को सांस्कृतिक भावनाओं से जोड़कर अपनी बात रखी।
हरिद्वार  संत समाज ने जताया समर्थन
कार्यक्रम में संत समाज की ओर से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की व्यवस्था के समर्थन में संकल्प व्यक्त किया गया। संतों ने इसे देश की चुनावी व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए इस पर जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही।
समागम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दोनों अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी और श्रीमहंत हरि गिरि समेत कई प्रमुख संत शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य संत समाज के बीच ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर विचार-विमर्श करना और इस विषय पर सामाजिक स्तर पर संवाद को आगे बढ़ाना बताया गया।
संतों से जनजागरण में सहयोग की अपील
हरिद्वार समागम में वक्ताओं ने कहा कि चुनाव सुधार से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर व्यापक सामाजिक और लोकतांत्रिक विमर्श आवश्यक है। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने संत समाज से लोगों तक ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के पक्ष में अपने विचार पहुंचाने का आह्वान किया।
हरिद्वार में आयोजित यह समागम ऐसे समय हुआ है जब देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक एवं सार्वजनिक स्तर पर चर्चा जारी है।