रुद्रप्रयाग। बसुकेदार तहसील के किमाणा-दानकोट क्षेत्र में लगातार हो रहे भूधंसाव और जमीन के कटाव से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव के विभिन्न हिस्सों में जमीन खिसकने के कारण कई आवासीय भवनों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। इसके अलावा गोशालाओं और शौचालयों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत से तैयार कृषि भूमि भी भूधंसाव की चपेट में आने लगी है, जिससे उन्हें आवासीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी प्रदीप थपलियाल ने किमाणा-दानकोट पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर भूधंसाव से हुए नुकसान और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद उन्होंने प्रशासन को मामले से अवगत कराया, जिसके पश्चात राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया।
क्षतिग्रस्त सड़क ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी
रुद्रप्रयाग भूधंसाव के साथ क्षेत्र की सड़क व्यवस्था भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बनी हुई है। जखोली-भीरी मोटर मार्ग पर बिनोबा धार बैंड से किमाणा-दानकोट तक कई स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त बताई जा रही है। आपदा के चलते सड़क के विभिन्न हिस्सों में हुए नुकसान से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। दैनिक जरूरतों और जरूरी कार्यों के लिए आवागमन करने में ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदीप थपलियाल ने लोक निर्माण विभाग से क्षतिग्रस्त हिस्सों की जल्द मरम्मत कर मार्ग पर यातायात व्यवस्था सुचारु करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय भूगर्भीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थायी और वैज्ञानिक उपचार किया जाना चाहिए।
रुद्रप्रयाग उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान भूधंसाव की स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। ऐसे में प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने प्रशासन से सड़क के साथ पेयजल व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं से संबंधित समस्याओं का भी प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने की मांग की।
प्रदीप थपलियाल ने कहा कि भूधंसाव जैसी गंभीर समस्या को केवल निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रभावित क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर भूधंसाव के कारणों का पता लगाना और उसके आधार पर स्थायी उपचार की योजना तैयार करना जरूरी है। समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने से संभावित बड़े नुकसान और हादसे को टाला जा सकता है।





















