नई दिल्ली में आयोजित नेशनल अर्बन एंड रियल एस्टेट डेवलपमेंट कॉन्क्लेव 2026 में देश के शहरी विकास को संतुलित, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूत करने से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
सम्मेलन में RERA कानून के तहत उपभोक्ताओं के अधिकारों को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई। साथ ही, SWAMIH फंड के जरिए अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने पर जोर दिया गया, ताकि घर खरीदने वालों को राहत मिल सके।
कार्यस्थलों के पास किफायती आवास विकसित करने और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति को बढ़ावा देने को शहरी यातायात और आवास समस्या के समाधान के रूप में देखा गया। इसके अलावा, मंदिर नगरों (Temple Cities) के विकास पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई, ताकि विरासत को आधुनिक बुनियादी ढांचे से जोड़ा जा सके।
वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा चुनौतियों को अवसर में बदलकर भारत के शहरी भविष्य को मजबूत बनाया जा सकता है। इसके लिए एक मजबूत, टिकाऊ और समावेशी रियल एस्टेट सेक्टर का निर्माण जरूरी है।
— NAREDCO (नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल)




















