बदरीनाथ: देहरादून। बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी का मामला अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। इस मुद्दे पर बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तथा पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल आमने-सामने आ गए हैं। मंगलवार को देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए।
गणेश गोदियाल ने कहा कि वर्तमान विवाद से जुड़े आरोपों से ध्यान भटकाने और अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए उनके कार्यकाल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उनके कार्यकाल से संबंधित कोई भी आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
बदरीनाथ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें देवस्थानम बोर्ड के गठन को व्यवस्था सुधार से जोड़ा गया था। गोदियाल ने कहा कि किसी संस्था को भंग कर देना समाधान नहीं होता, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाना सरकार की जिम्मेदारी होती है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से बीकेटीसी अध्यक्ष को खुली चर्चा के लिए आमंत्रित किया था, ताकि दोनों पक्ष अपने-अपने तथ्यों को जनता और मीडिया के सामने रख सकें। उन्होंने दावा किया कि वह तय समय पर प्रेस क्लब पहुंचे, लेकिन बीकेटीसी अध्यक्ष वहां नहीं आए। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी भी मंच पर चर्चा के लिए बुलाया जाएगा तो वह उसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं।
बदरीनाथ गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार मौजूदा विवाद से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय उनके कार्यकाल को मुद्दा बनाकर वास्तविक प्रश्नों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करने के बजाय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने अपने बीकेटीसी अध्यक्ष रहते हुए बिनसर मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर का पुनर्निर्माण स्थानीय लोगों की मांग और समिति के विधिवत प्रस्ताव के आधार पर शुरू किया गया था। उनके अनुसार उस समय समिति के अधिकांश नामित सदस्य तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में नियुक्त थे और बोर्ड की स्वीकृति के बाद ही कार्य प्रारंभ हुआ था।
बदरीनाथ गोदियाल का आरोप है कि वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद मंदिर निर्माण कार्य रोक दिया गया, जबकि उस समय तक लगभग नौ लाख रुपये व्यय किए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये थी। बाद में देवस्थानम बोर्ड के गठन के पश्चात मंदिर निर्माण को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बदरीनाथ चढ़ावा विवाद को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब इस मामले ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। सभी की निगाहें अब इस मामले में सरकार और बीकेटीसी की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।




















