गांधी जयंती
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शांति, अहिंसा और सर्वोदयी विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया। राष्ट्रपति ने देशवासियों से नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सशक्त, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी संदेश के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू ने महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर देश की ओर से उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जीवन और उनके आदर्श वैश्विक समुदाय में व्यापक रूप से सम्मानित हैं।
संघर्ष के दौर में शांति और अहिंसा का महत्व
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में वर्तमान में युद्ध और संघर्ष का वातावरण है, जिसका प्रभाव सभी देशों पर पड़ रहा है। ऐसे परिस्थितियों में महात्मा गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़े गांधीजी के विचार
सरकार की ओर से जारी राष्ट्रपति के संदेश में कहा गया है कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में सहानुभूति और समावेशन के मूल्यों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, ताकि विकास के लाभ से कोई नागरिक वंचित न रहे।
राष्ट्रपति ने इस दृष्टिकोण को महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ के आदर्श से जोड़ा, जिसका आधार सभी के कल्याण और उत्थान का सिद्धांत है।
नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी का आह्वान
राष्ट्रपति मुर्मू ने गांधी जयंती के अवसर पर देशवासियों से नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से एक सशक्त, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया।
पाठकों के लिए इसका क्या अर्थ है?
राष्ट्रपति के संदेश का मुख्य जोर गांधीजी के शांति, अहिंसा, सहानुभूति, समावेशन और सर्वजन के कल्याण जैसे मूल्यों को वर्तमान राष्ट्रीय विकास की दिशा से जोड़ने पर है। संदेश में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और नैतिक आचरण को विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण से जोड़ा गया है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार
प्रकाशन तिथि: 1 अक्टूबर 2026























