भारत की ऊर्जा सुरक्षा
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में मजबूत नियमन, बाजार आधारित सुधारों और संस्थागत क्षमता को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए श्री राजीव गौबा ने नियामकीय व्यवस्था को बदलती तकनीक और नए कारोबारी मॉडल के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया है।
PIB के अनुसार, पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में राजीव गौबा ने कहा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों, आपूर्ति में व्यवधान और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े जोखिमों वाले जटिल वैश्विक वातावरण में काम कर रहा है।
नियमन और सुधारों को बताया ऊर्जा सुरक्षा का आधार
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, गौबा ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नियामकीय बदलावों की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय क्षेत्र औपनिवेशिक दौर के कानून और विदेशी स्वामित्व से आगे बढ़कर कई दशकों तक राज्य नियंत्रण और प्रशासित मूल्य व्यवस्था के दौर से गुजरा।
उन्होंने बताया कि 1990 के दशक के अंत से शुरू हुए क्रमिक उदारीकरण के बाद 40 वर्षों से चली आ रही नामांकन आधारित एकाधिकार व्यवस्था समाप्त हुई और प्रशासित मूल्य तंत्र को हटाया गया। वर्ष 2006 में PNGRB की स्थापना को उन्होंने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, निवेशकों का भरोसा और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संस्थागत कदम बताया।
गैस पाइपलाइन नेटवर्क में खुले उपयोग पर जोर
गौबा ने प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने में PNGRB के योगदान को भी रेखांकित किया। PIB के मुताबिक, उन्होंने कहा कि कॉमन कैरियर और कॉन्ट्रैक्ट कैरियर के सिद्धांतों ने पाइपलाइन बुनियादी ढांचे तक खुले उपयोग को बढ़ावा देने में मदद की है।
उनके अनुसार, इससे डाउनस्ट्रीम बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि नियामकीय कार्य अक्सर सीधे दिखाई नहीं देता, लेकिन पूर्वानुमान योग्य बाजार बनाने, निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और जनता का भरोसा मजबूत करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
घरेलू ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की जरूरत
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए घरेलू ऊर्जा क्षमता के विविधीकरण और विस्तार को दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
गौबा ने शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और जीवन स्तर में सुधार के साथ ऊर्जा मांग में उल्लेखनीय वृद्धि की अपेक्षा का उल्लेख करते हुए घरेलू अन्वेषण और उत्पादन में तेजी लाने की जरूरत बताई। उन्होंने विशेष रूप से फ्रंटियर और डीप-वॉटर गतिविधियों पर जोर दिया तथा तकनीक, निजी निवेश और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की क्षमताओं का उपयोग करने की बात कही।
गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण पर जोर
गौबा ने भारत के गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को भी तेज करने की आवश्यकता बताई। इसके लिए उन्होंने एकीकृत, कुशल और आर्थिक रूप से व्यवहार्य प्राकृतिक गैस वैल्यू चेन को आवश्यक बताया।
PIB के अनुसार, इसमें नेशनल गैस ग्रिड को मजबूत करना, पाइपलाइनों और LNG टर्मिनलों के उपयोग में सुधार तथा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार शामिल है।
हाइड्रोजन और नई तकनीकों के लिए नियमन में बदलाव
सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि नियामकीय सुधारों को अनावश्यक अड़चनों को दूर करने और उभरते क्षेत्रों के अनुरूप ढांचे को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। इसमें हाइड्रोजन, सिनगैस और कार्बन डाइऑक्साइड पाइपलाइनों जैसे नए क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।
PNGRB की भविष्य की भूमिका पर बोलते हुए गौबा ने कहा कि तकनीकी बदलाव और नए कारोबारी मॉडल के साथ नियमन को भी विकसित होना चाहिए, जबकि सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण को प्राथमिकता बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने नियामकीय पूर्वानुमेयता, कारोबार करने में आसानी और निरंतर सुधार को बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।
नियामकीय स्वतंत्रता के साथ पारदर्शिता पर भी जोर
गौबा ने कहा कि नियामकीय स्वतंत्रता के साथ पारदर्शिता, तर्कसंगत निर्णय लेने की प्रक्रिया और जवाबदेही भी जरूरी है। PIB के अनुसार, उन्होंने कहा कि नियामकों को स्वतंत्र रूप से काम करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए, साथ ही व्यापक राष्ट्रीय नीति उद्देश्यों के अनुरूप भी रहना चाहिए।
पाठकों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस संबोधन का मुख्य संदेश यह है कि सरकार के अनुसार भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। पाइपलाइन और गैस नेटवर्क का विस्तार, घरेलू ऊर्जा उत्पादन, निजी निवेश, नई तकनीकों का उपयोग और अधिक पूर्वानुमान योग्य नियामकीय व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हैं।
यदि इन क्षेत्रों में नियामकीय ढांचा विकसित होता है, तो इसका प्रभाव ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, बुनियादी ढांचे के विस्तार, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता हितों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। हालांकि, PIB की इस विज्ञप्ति में किसी विशिष्ट नए नियम, समयसीमा या लागू की गई नई नीति की घोषणा नहीं की गई है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार
प्रकाशन: 1 अक्टूबर 2026
























