उत्तरकाशी: लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के बीच जिला प्रशासन ने स्यानाचट्टी क्षेत्र में राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों में तेजी ला दी है। शनिवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात जल्द बहाल करने, वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और सभी आवश्यक संसाधन तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उत्तरकाशी: निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने यमुना नदी पर निर्माणाधीन पुल का कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा करने के निर्देश राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को दिए।
उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही राहत, बचाव और पुनर्बहाली कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए।
उत्तरकाशी : डीएम ने उपजिलाधिकारी बड़कोट को ट्रांसशिपमेंट व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए। वैकल्पिक पैदल मार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर रस्सियां, सोलर लाइट और अन्य सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने को भी कहा।
इसके अलावा उन्होंने सिंचाई विभाग द्वारा यमुना नदी में किए जा रहे चैनलाइजेशन कार्यों का निरीक्षण कर मशीनों की संख्या बढ़ाने और नदी के प्रवाह में बाधा बने मलबे को शीघ्र हटाने के निर्देश दिए, ताकि संभावित जोखिम को कम किया जा सके।
उत्तरकाशी: छह घंटे में बनी अस्थायी सड़क, तीन दिन से फंसे 20 से अधिक वाहन निकाले
उत्तरकाशी: स्यानाचट्टी में सड़क क्षतिग्रस्त होने से हनुमानचट्टी, फूलचट्टी और बनास क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से 20 से अधिक वाहन फंसे हुए थे। जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुपड़ा पुल के समीप मात्र छह घंटे में पहाड़ काटकर अस्थायी मार्ग तैयार किया, जिसके बाद सभी वाहनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुस्साईं ने बताया कि लगातार बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मशीनें और संसाधन तत्काल मौके पर पहुंचाए गए, जिससे राहत कार्य तेजी से पूरा किया जा सका।
राहत मिलने के बाद वाहन चालकों और यात्रियों ने प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना था कि जिला प्रशासन ने समय पर कार्रवाई कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का अपना वादा पूरा किया।
उत्तरकाशी: प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत, सुरक्षा और यातायात बहाली के कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है और सभी जरूरी व्यवस्थाएं प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जा रही हैं।
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