लुधियाना
लुधियाना: धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पराली प्रबंधन को लेकर किसानों के समर्थन में अपना रुख स्पष्ट किया है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) में आयोजित किसान मेले के दौरान मान ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
मान ने केंद्र सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब केंद्रीय पूल में बड़ी मात्रा में धान देता है, लेकिन उससे पैदा होने वाली पराली के प्रबंधन की चुनौती पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने किसानों को पराली न जलाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने की बात कही।
₹3,000 प्रति एकड़ की मांग
पंजाब के धान उत्पादक किसान पराली के उचित प्रबंधन के लिए ₹3,000 प्रति एकड़ नकद प्रोत्साहन की मांग कर रहे हैं। मान ने इस मांग का सिद्धांत रूप से समर्थन किया है। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने लगभग ₹1,500 प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं और ऐसे प्रबंधन उपाय अपनाएं, जिससे FIR या कानूनी कार्रवाई की स्थिति ही न आए।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में कमी
पंजाब सरकार के अनुसार, राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 2023 से 2025 के बीच 86 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, घटनाएं 2023 में 36,663 से घटकर 2024 में 10,909 और 2025 में 5,114 रह गईं।
सरकार इस साल भी गांव और ब्लॉक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के साथ किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों के लिए मशीनरी उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।
दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर भी चर्चा
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को दिल्ली-NCR में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक के रूप में चर्चा की जाती है। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय होने के कारण कुछ किसान खेत जल्दी खाली करने के लिए पराली जलाने का रास्ता अपनाते हैं।
मान ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज का भी जिक्र किया और कहा कि प्रदूषण के लिए केवल पंजाब को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होने वाले उत्सर्जन का भी उल्लेख किया।
किसान संगठनों ने भी उठाई मांग
किसान संगठनों के नेताओं ने पराली प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता की मांग दोहराई है। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने पहले से दर्ज पराली जलाने संबंधी FIR वापस लेने की मांग की, जबकि BKU (लखोवाल) के नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने भी किसानों को नकद प्रोत्साहन देने की बात कही।






















