RBI Bulletin
नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सितंबर 2026 का अपना मासिक Bulletin जारी किया है। RBI के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है।
RBI Bulletin में ‘State of the Economy’, ‘Credit-Deposit Divergence: A Balance Sheet Decomposition’ और ‘Private Corporate Investment: Growth in 2025-26 and Outlook for 2026-27’ समेत तीन प्रमुख लेख शामिल हैं। Bulletin में सात भाषण और मौजूदा आर्थिक आंकड़े भी शामिल हैं।
पहली तिमाही में 7.8% की आर्थिक वृद्धि
RBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। केंद्रीय बैंक ने कहा कि अगस्त 2026 तक उपलब्ध हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतकों से भी अर्थव्यवस्था में मजबूती दिखाई दी।
RBI ने बताया कि मजबूत निर्यात वृद्धि के कारण माल व्यापार घाटा (merchandise trade deficit) कम हुआ। हालांकि, अगस्त में हेडलाइन महंगाई बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। RBI के अनुसार, इसमें खाद्य एवं पेय पदार्थों के साथ ईंधन और कोर घटकों में बढ़ोतरी का योगदान रहा।
विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर
RBI के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में चालू खाते में मध्यम घाटा रहा, जबकि मजबूत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह ने बाहरी क्षेत्र को समर्थन दिया।
केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। FCNR(B) जमा में प्रवाह के बाद बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी (system liquidity surplus) भी बढ़ी।
बैंक क्रेडिट और जमा के बीच अंतर पर RBI की रिपोर्ट
RBI के एक अन्य लेख में बैंक क्रेडिट और जमा की वृद्धि के बीच बढ़ते अंतर का विश्लेषण किया गया है।
RBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 से बैंक क्रेडिट की वृद्धि कुल जमा की वृद्धि से अधिक रही है और इससे क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) अनुपात 80 प्रतिशत से ऊपर चला गया है।
लेख में कहा गया है कि आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था में बैंक द्वारा ऋण देने या निवेश करने के दौरान जमा भी बन सकते हैं। इसलिए, बैंक द्वारा पहले से जमा जुटाना हर स्थिति में क्रेडिट देने की अनिवार्य शर्त नहीं है।
RBI के अध्ययन के अनुसार, बैंक क्रेडिट देने का फैसला लाभप्रदता और नियामकीय व्यवस्था के भीतर करते हैं। जहां ऋण देने से अन्य विकल्पों की तुलना में बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न मिलने की संभावना होती है, वहां बैंक क्रेडिट बढ़ाना जारी रख सकते हैं।
RBI के लेख में यह भी कहा गया है कि सिर्फ CD ratio के आधार पर बैंकिंग प्रणाली की funding vulnerability को मापना उचित नहीं हो सकता, खासकर ऐसी स्थिति में जब अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली में क्रेडिट वृद्धि मजबूत हो।
निजी कंपनियों के निवेश में सुधार के संकेत
RBI के तीसरे लेख में निजी कॉरपोरेट क्षेत्र के निवेश और 2026-27 के लिए उसके आउटलुक का विश्लेषण किया गया है।
RBI के अनुसार, 2025-26 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा मंजूर परियोजनाओं की कुल लागत और परियोजनाओं की संख्या, पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी। केंद्रीय बैंक ने इसे निजी क्षेत्र की निवेश गतिविधियों में सुधार का संकेत बताया।
इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को प्रस्तावित पूंजी निवेश में सबसे बड़ा हिस्सा मिला, जिसमें पावर सेक्टर प्रमुख रहा।
RBI के अनुसार, निजी कंपनियों की 2025-26 के लिए प्रस्तावित कुल पूंजीगत व्यय (capex) पिछले वर्ष की योजना की तुलना में बढ़ा।
2026-27 के लिए pipeline projects की phasing plans को देखते हुए, सभी वित्तपोषण माध्यमों को मिलाकर निजी कॉरपोरेट क्षेत्र का envisaged capex लगभग ₹3.2 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
RBI के इस Bulletin से सामने आने वाली मुख्य तस्वीर यह है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
पाठकों के लिए प्रमुख बातें:
- पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7.8% रही।
- अगस्त में हेडलाइन महंगाई 4.8% तक पहुंची।
- निर्यात में मजबूती से माल व्यापार घाटा कम हुआ।
- विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
- बैंक क्रेडिट और जमा की वृद्धि के बीच अंतर पर RBI ने विस्तृत अध्ययन किया।
- निजी कंपनियों के निवेश और पूंजीगत खर्च में सुधार के संकेत मिले हैं।
- 2026-27 के लिए निजी कॉरपोरेट क्षेत्र के envisaged capex का अनुमान ₹3.2 लाख करोड़ है।
हालांकि, RBI ने Bulletin में वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों और वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता को भी प्रमुख जोखिमों के रूप में रेखांकित किया है।
महत्वपूर्ण: RBI Bulletin में प्रकाशित लेखों के विचार संबंधित लेखकों के हैं और RBI ने स्पष्ट किया है कि ये विचार Reserve Bank of India के आधिकारिक विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।























