हरिद्वार। श्रावण मास के शुभारंभ के साथ ही गुरुवार से धर्मनगरी हरिद्वार में विश्वप्रसिद्ध कांवड़ मेले की रौनक भी बढ़ने लगी है। सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है, जिसे लेकर देशभर से शिवभक्त गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं। इस बार भी कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की अनोखी आस्था, भक्ति और सेवा भावना लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी विभिन्न प्रकार की आकर्षक और संदेश देने वाली कांवड़ें मेले की विशेष पहचान बनी हुई हैं। दिल्ली के हर्ष विहार निवासी दीपांशु अपने नौ साथियों के साथ ऐसी कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचे, जिसे 10, 20, 50 और 100 रुपये के वास्तविक नोटों से सजाया गया था। गंगाजल भरने के बाद उनका जत्था दिल्ली के लिए रवाना हो गया।
हरिद्वार दीपांशु ने बताया कि पिछले वर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान उनके मन में नोटों से सजी कांवड़ तैयार करने का विचार आया था, जिसे इस बार साकार किया गया। उन्होंने बताया कि कांवड़ पर लगे नोटों की कुल राशि का अलग से कोई हिसाब नहीं रखा गया। उपलब्ध नोटों को श्रद्धा के साथ सजाया गया है। बारिश से नोटों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। यात्रा पूरी होने के बाद इन नोटों का उपयोग किसी धार्मिक भंडारे के आयोजन अथवा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भगवान शिव उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं तो अगले वर्ष वह इससे भी अधिक भव्य कांवड़ लेकर हरिद्वार आएंगे।
हरिद्वार वहीं, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के चिरचिट गांव से आए दो सगे भाई संजीव कुमार और अनिल कुमार अपनी अनूठी सेवा भावना के कारण श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बने रहे। दोनों भाई अपने माता-पिता वेदराम और राजेंद्र को विशेष रूप से तैयार की गई कांवड़ में बैठाकर लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा पर निकले हैं। हर की पैड़ी से गंगाजल भरने के बाद वे अपने माता-पिता के साथ बागपत के लिए रवाना हुए।
दोनों भाइयों ने बताया कि उनकी इस यात्रा के पीछे कोई व्यक्तिगत मनोकामना नहीं है। उनका उद्देश्य केवल माता-पिता की सेवा करना और समाज को उनका सम्मान करने का संदेश देना है। उनका मानना है कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और उनका आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और सुख प्राप्त करने के लिए माता-पिता का सम्मान और सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
श्रावण मास के आरंभ के साथ हरिद्वार में कांवड़ मेले की धार्मिक और सांस्कृतिक छटा अब पूरी तरह दिखाई देने लगी है। कहीं अनूठी कांवड़ें श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं तो कहीं सेवा, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरक मिसालें देखने को मिल रही हैं। आस्था, भक्ति और सामाजिक संदेशों से सराबोर यह कांवड़ यात्रा एक बार फिर हरिद्वार की आध्यात्मिक पहचान को सशक्त करती नजर आ रही है





















