लद्दाख: लद्दाख के प्रसिद्ध द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण इसके मुहाने पर एक नई झील का निर्माण हुआ है। ग्लेशियर से लगातार बर्फ पिघलने के चलते झील में पानी का स्तर बढ़ रहा है, जिससे संभावित खतरे को लेकर वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं।
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर के पास कैंप स्थापित कर झील की स्थिति पर नजर बनाए रखी है। वैज्ञानिक झील के जलस्तर, गहराई और ग्लेशियर के पिघलने की गति की रियल-टाइम निगरानी कर रहे हैं।
लद्दाख 2010 के बाद अस्तित्व में आई झील
अध्ययनों के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी गहरी जगह में बर्फ का पिघला पानी जमा होने लगा, जिसके बाद यहां झील का निर्माण हुआ। 2021 में किए गए बाथिमेट्री सर्वे के दौरान झील का विस्तृत अध्ययन किया गया।
लद्दाख सर्वे में झील की जल क्षमता करीब 1.8 लाख घन मीटर, औसत गहराई लगभग 1.91 मीटर और अधिकतम गहराई करीब 3.85 मीटर दर्ज की गई।
ग्लेशियर पीछे हटने की रफ्तार बढ़ी
करीब 24 किलोमीटर लंबे द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर के पीछे हटने से इसके मुहाने पर बनी यह प्रोग्लेशियल झील लगातार विकसित हो रही है। उपलब्ध अध्ययनों के मुताबिक, झील का क्षेत्रफल वर्ष 2017 में करीब 16.62 हेक्टेयर से बढ़कर 2023 में लगभग 39.1 हेक्टेयर हो गया।
लद्दाख
वैज्ञानिकों के मुताबिक, झील के बढ़ते जलस्तर से ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। स्थिति गंभीर होने पर अतिरिक्त पानी को सुरक्षित तरीके से निकालने की तैयारी भी की जा रही है।
भविष्य में पानी की कमी की आशंका
द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर लद्दाख जैसे ठंडे और शुष्क क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। फिलहाल ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय में ग्लेशियर के सिकुड़ने से स्थानीय खेती, पेयजल और जलविद्युत परियोजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
वैज्ञानिकों की लगातार निगरानी का उद्देश्य झील के जलस्तर में होने वाले बदलावों को समय रहते समझना और संभावित जोखिम से निपटने की तैयारी करना है।




















