भारत-UK Financial Markets Dialogue 2026
लंदन, 8 अक्टूबर 2026। भारत और ब्रिटेन ने वित्तीय बाजारों में सहयोग को आगे बढ़ाने, सीमा-पार निवेश के अवसरों को तलाशने और वित्तीय सेवाओं में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर सहमति जताई है। यह सहमति 29 सितंबर 2026 को लंदन में आयोजित चौथे UK-India Financial Markets Dialogue (FMD) के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में सामने आई है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अनुसार, संवाद में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रमुख वित्तीय नियामक संस्थाओं ने भाग लिया।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
भारत सरकार के अनुसार, वार्ता में मुख्य रूप से कैपिटल मार्केट, बीमा एवं पेंशन, एसेट मैनेजमेंट, फिनटेक और वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने टिकाऊ आर्थिक विकास, खुले और मजबूत वित्तीय बाजार तथा भारत-ब्रिटेन के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने की साझा प्राथमिकताओं को दोहराया।
संवाद में भारत की ओर से SEBI, RBI, IFSCA, PFRDA और IRDAI तथा ब्रिटेन की ओर से Bank of England और Financial Conduct Authority सहित संबंधित संस्थाओं ने भाग लिया।
GIFT IFSC के जरिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी जुटाने पर जोर
संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, भारत ने अपने पूंजी बाजारों में वैश्विक निवेशकों की भागीदारी को आसान बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों की जानकारी साझा की। RBI ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी और कॉरपोरेट ऋण तक पहुंच को आसान बनाने से जुड़े विकासों पर भी जानकारी दी।
दोनों देशों ने GIFT IFSC की अंतरराष्ट्रीय पूंजी को भारत की ओर आकर्षित करने में बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। भारत और ब्रिटेन ने GIFT IFSC के विकास को समर्थन देने के लिए नियामकीय सहयोग और अनुभव साझा करने को जारी रखने पर सहमति जताई।
भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी तक पहुंच पर चर्चा
सरकार के मुताबिक, दोनों पक्षों ने सीमा-पार निवेश बढ़ाने और भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय पूंजी तक पहुंच के अवसरों पर चर्चा की। इसमें GIFT-IFSC के माध्यम से क्रॉस-बॉर्डर इक्विटी और बॉन्ड लिस्टिंग तथा पूंजी बाजारों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे शामिल रहे।
दोनों पक्षों ने अगले Economic and Financial Dialogue से पहले भविष्य में पूंजी बाजार सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति जताई।
बीमा और पेंशन क्षेत्र में सहयोग
संवाद में भारत और ब्रिटेन के बीमा तथा पेंशन बाजारों से जुड़े सुधारों और अवसरों पर भी चर्चा हुई। भारत ने बीमा क्षेत्र में कवरेज, निवेश और बाजार क्षमता बढ़ाने से जुड़ी अपनी महत्वाकांक्षाओं को साझा किया।
दोनों पक्षों ने Insurance and Pensions Workplan, जिसे 2023 में स्थापित किया गया था, के महत्व को रेखांकित किया। इसके अलावा, भारत के बदलते नियामकीय ढांचे और ब्रिटेन के London Market तथा भारतीय बीमा एवं पुनर्बीमा कंपनियों के बीच सहयोग से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा हुई।
एसेट मैनेजमेंट और Sustainable Finance पर सहयोग
भारत और ब्रिटेन ने एसेट मैनेजमेंट के नियामकीय ढांचे और बाजारों से जुड़े अपडेट साझा किए। दोनों देशों ने नियामकीय सहयोग जारी रखने और एक-दूसरे के बाजारों में निवेश बढ़ाने के लिए नियमों, निवेशकों की आवश्यकताओं और बाजार परिस्थितियों की बेहतर समझ के महत्व को स्वीकार किया।
संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारतीय रुपये के आगे अंतरराष्ट्रीयकरण पर भी चर्चा की और लंदन की offshore rupee trading hub के रूप में भूमिका को स्वीकार किया।
Sustainable Finance के मुद्दे पर दोनों देशों ने विश्वसनीय ढांचे, बेहतर disclosures, वैश्विक मानकों और निवेशकों के भरोसे को महत्वपूर्ण बताया, ताकि low-carbon और climate-resilient transition के लिए निजी पूंजी जुटाने में मदद मिल सके।
Fintech, AI और डिजिटल भुगतान पर भी चर्चा
वित्तीय तकनीक और innovation भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। भारत ने Digital Public Infrastructure (DPI) के माध्यम से fintech adoption और financial inclusion के अपने अनुभव साझा किए। इसमें digital identity, digital payments, Central Bank Digital Currencies (CBDCs) और data exchange frameworks जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
दोनों देशों ने जिम्मेदार innovation और competition को बढ़ावा देने के साथ नियामकीय निगरानी बनाए रखने के महत्व पर सहमति जताई। Artificial Intelligence (AI) के वित्तीय सेवाओं में संभावित अवसरों और जोखिमों पर भी विचार साझा किए गए।
सरकार के अनुसार, नई तकनीकों के आपराधिक इस्तेमाल से financial fraud, cyber security, data protection और operational resilience से जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम के लिए तकनीक तथा नियामकीय innovation के अपने अनुभव साझा किए और संबंधित अधिकारियों के बीच सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई।
Cross-Border Payments को लेकर क्या हुआ?
भारत और ब्रिटेन ने G20 Roadmap for Enhancing Cross-Border Payments के प्रति अपना समर्थन दोहराया। दोनों पक्षों ने सीमा-पार भुगतान में बाधाएं कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़ी प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
दोनों देशों ने अपने retail payment infrastructures से जुड़े विकासों की जानकारी भी साझा की और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों के बीच interoperability और interlinkages को बढ़ावा देने के लिए G20 के प्रयासों को महत्व दिया।
Vision 2035 और भारत-ब्रिटेन आर्थिक संबंध
संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने Vision 2035 के संदर्भ में मजबूत होते संबंधों का उल्लेख किया। साथ ही, भारत-UK Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) के implementation को आगे बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया गया। सरकारी वक्तव्य के अनुसार, CETA 15 जुलाई 2026 को प्रभावी हुआ।
दोनों पक्षों ने विभिन्न workstreams में प्रगति जारी रखने और संबंधित द्विपक्षीय तंत्रों तथा अगले UK-India Economic and Financial Dialogue में इसकी समीक्षा करने पर सहमति जताई।
आम लोगों और कारोबार के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकारी संयुक्त वक्तव्य को देखें तो इस संवाद का तत्काल अर्थ किसी नई निवेश योजना या सीधे तौर पर आम नागरिकों को मिलने वाले लाभ की घोषणा नहीं है। इसका मुख्य फोकस भारत और ब्रिटेन के वित्तीय बाजारों के बीच नियामकीय सहयोग, निवेश की संभावनाओं, GIFT IFSC, fintech, sustainable finance और cross-border payments से जुड़े ढांचे को आगे बढ़ाने पर है।
यदि इन क्षेत्रों में प्रस्तावित सहयोग आगे बढ़ता है, तो इसका असर मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों, निवेशकों, बीमा एवं पेंशन क्षेत्र, fintech कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों से जुड़ी भारतीय कंपनियों के लिए प्रासंगिक हो सकता है। हालांकि, PIB के इस वक्तव्य में किसी विशेष निवेश राशि, नई योजना, नई नौकरी संख्या या आम नागरिक के लिए किसी तत्काल वित्तीय लाभ की घोषणा नहीं की गई है।
आधिकारिक स्रोत: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की PIB रिलीज, 7 अक्टूबर 2026।
























