एशियन गेम्स 2026 के भारतीय खिलाड़ियों से मिले पीएम मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों के दल से मुलाकात कर उनके प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने तिरंगे को ऊंचा किया है और देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में उभरेगा।
15 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री की इस मुलाकात से संबंधित प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), दिल्ली की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों के साथ उनके प्रशिक्षकों, सहयोगी स्टाफ और परिवारों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के लिए गर्व का विषय है।
महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बताया नए भारत की पहचान
प्रधानमंत्री ने एशियन गेम्स में भारतीय महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन की विशेष रूप से प्रशंसा की। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, भारत के कुल 85 पदकों में से 38 पदक महिला खिलाड़ियों ने हासिल किए, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल रहे।
मोदी ने कहा कि महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि सशक्त होते नए भारत की तस्वीर भी प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने तीरंदाजी, निशानेबाजी, मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स सहित विभिन्न खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की।
विज्ञप्ति में पुरुष और महिला हॉकी टीमों के स्वर्ण पदक जीतने, कबड्डी में दो स्वर्ण पदक हासिल करने और क्रिकेट टीमों के लगातार पदक जीतने का भी उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार के एशियन गेम्स कई मायनों में यादगार रहे।
पहली बार कई खेलों में भारत ने दर्ज कराई पदक जीत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने कुछ ऐसे खेलों में भी पदक जीते, जिनमें एशियन गेम्स के इतिहास में भारत को पहले पदक नहीं मिले थे। सरकारी विज्ञप्ति में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस और नौकायन की कुछ स्पर्धाओं में मिली उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने खिलाड़ियों से भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने, नए रिकॉर्ड बनाने तथा हर खेल में नए चैंपियन तैयार करने का आह्वान किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ सामूहिक संकल्प भी दोहराया कि भारत खेल के हर मैदान में अपनी पहचान मजबूत करेगा।
खेलों के विकास के लिए 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक आवंटन का दावा
प्रधानमंत्री ने पिछले 10 से 12 वर्षों में देश के खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने खेलो इंडिया कार्यक्रम के विस्तार और खेल महासंघों को मजबूत करने के लिए 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक के आवंटन की बात कही।
मोदी ने टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) और खेलो इंडिया को खिलाड़ियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि देश में खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकारी विज्ञप्ति में टॉप्स के अंतर्गत खिलाड़ियों को 50 हजार रुपये मासिक आउट-ऑफ-पॉकेट भत्ता देने तथा विदेश में प्रशिक्षण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी उल्लेख है।
गांवों और छोटे शहरों की प्रतिभाओं पर रहेगा ध्यान
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों में प्रतिभाओं की पहचान कम उम्र से करना जरूरी है। उन्होंने खेलो इंडिया और इमर्जिंग खेलो इंडिया के माध्यम से पांच से 15 वर्ष तक के बच्चों की प्रतिभा पहचानने और उन्हें प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि सरकार गांवों और स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को सामने लाने के प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से भी अपील की कि वे अपने स्कूलों, पुराने खेल मैदानों और गांवों में जाकर बच्चों से संवाद करें तथा उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
उनके अनुसार, अनुभवी खिलाड़ियों के मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को प्रोत्साहन मिलेगा और देश में खेल संस्कृति मजबूत होगी।
2030 राष्ट्रमंडल खेल और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की आकांक्षा
प्रधानमंत्री ने भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने और भारत को दुनिया के अग्रणी खेल देशों में शामिल करने की आकांक्षा भी व्यक्त की। उन्होंने वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की भारत में मेजबानी और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लक्ष्य का उल्लेख किया।
उन्होंने विश्वस्तरीय खेल बुनियादी ढांचे के निर्माण, देश के हर हिस्से से चैंपियन तैयार करने और भारत को वैश्विक खेल केंद्र बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
खेलों से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों का विस्तार केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। इससे खेल प्रशिक्षक, फिजियोथेरेपिस्ट, खेल प्रबंधन और खेल प्रसारण जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खेल खिलाड़ियों में अनुशासन, धैर्य, लक्ष्य के प्रति समर्पण और हार के बाद दोबारा उठकर आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करते हैं। ये गुण खेल के मैदान के साथ जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित होते हैं।
प्रधानमंत्री ने दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को यह विश्वास होना चाहिए कि पूरा देश उनकी यात्रा में उनके साथ खड़ा है।
युवाओं की प्रतिभा से विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने खेलों में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों को देश की व्यापक प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि छोटे शहरों और गांवों के युवा खेल, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, रक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता दिखा रहे हैं।
उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और मेहनत देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आम लोगों के लिए क्या मायने हैं?
प्रधानमंत्री के संबोधन में खेल सुविधाओं के विस्तार, शुरुआती उम्र में प्रतिभा की पहचान, खिलाड़ियों को आर्थिक और प्रशिक्षण सहायता तथा खेलों से जुड़े रोजगार के अवसरों पर जोर दिया गया। इन पहलों का लाभ खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों, खेल प्रबंधन से जुड़े युवाओं और स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाएं विकसित करने वाले क्षेत्रों को भी मिल सकता है।
हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि योजनाओं का क्रियान्वयन किस तरह होता है और खिलाड़ियों तक प्रशिक्षण, सुविधाएं तथा वित्तीय सहायता कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है।
























