National Highways
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और विस्तार के साथ वन्यजीव संरक्षण को जोड़ने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ‘Wildlife Mitigation Measures & Structures’ नाम से एक दस्तावेज जारी किया है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही, आवासों की कनेक्टिविटी और सड़क दुर्घटनाओं से वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अपनाए जा रहे उपायों का विवरण दिया गया है। यह जानकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने PIB के माध्यम से दी है।
NHAI के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में वन्यजीवों से संबंधित mitigation infrastructure और पर्यावरण संरक्षण उपायों पर करीब ₹19,700 करोड़ खर्च किए गए हैं। वहीं, देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2,150 से अधिक wildlife mitigation structures का निर्माण किया जा चुका है या उन्हें प्रस्तावित किया गया है।
National Wildlife Week के दौरान जारी किया गया दस्तावेज
NHAI ने यह दस्तावेज National Wildlife Week, जो 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक मनाया गया, के अवसर पर जारी किया। PIB के अनुसार, दस्तावेज को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के एकता नगर में आयोजित Chintan Shivir के दौरान जारी किया था।
सरकार के मुताबिक, दस्तावेज का उद्देश्य यह बताना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की planning, design और implementation में wildlife conservation को किस तरह शामिल किया जा रहा है।
हाईवे के साथ वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर
NHAI के अनुसार, बड़े राजमार्ग वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को अलग कर सकते हैं और उनके आवागमन में बाधा पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा सड़क पर वाहनों की आवाजाही से wildlife–vehicle collisions का जोखिम भी पैदा होता है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए NHAI ने अलग-अलग राजमार्ग corridors की ecological sensitivity, wildlife movement patterns और engineering feasibility के आधार पर mitigation measures की planning करने की बात कही है।
2,150 से ज्यादा Wildlife Mitigation Structures
सरकारी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2,150 से अधिक wildlife mitigation structures बनाए गए हैं या प्रस्तावित हैं।
इनमें शामिल हैं:
- Animal Under Passes (AUPs)
- Animal Overpasses
- Major Bridge-cum-AUPs
- Minor Bridge-cum-AUPs
- Wildlife-friendly culverts
- Canopy crossings
- अन्य विशेष wildlife crossings
इनका उद्देश्य राजमार्गों के एक तरफ से दूसरी तरफ वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए निर्धारित रास्ते उपलब्ध कराना है।
किन संरचनाओं पर कितना निवेश?
PIB के अनुसार, wildlife mitigation से जुड़े structural measures में अलग-अलग मदों पर निम्न निवेश बताया गया है:
| संरचना | निवेश |
|---|---|
| Animal Underpasses | करीब ₹4,600 करोड़ |
| Animal Overpasses | करीब ₹650 करोड़ |
| Viaducts | करीब ₹8,300 करोड़ |
| Tunnels | करीब ₹2,800 करोड़ |
| Major Bridges | करीब ₹2,500 करोड़ |
| Minor Bridges | करीब ₹500 करोड़ |
इन छह मदों का योग करीब ₹19,350 करोड़ बैठता है। वहीं, सरकार ने पिछले पांच वर्षों में wildlife mitigation infrastructure और संबंधित environmental protection measures पर कुल निवेश करीब ₹19,700 करोड़ बताया है। इसलिए ₹19,700 करोड़ को व्यापक कुल आंकड़े के रूप में और ₹19,350 करोड़ को ऊपर सूचीबद्ध structural categories के योग के रूप में समझना चाहिए।
सिर्फ अंडरपास ही नहीं, कई दूसरे उपाय भी
NHAI के अनुसार, वन्यजीव संरक्षण के लिए केवल underpasses और overpasses पर निर्भर नहीं किया जा रहा है। कई non-structural measures भी अपनाए जा रहे हैं।
इनमें शामिल हैं:
- Noise barriers
- Reptile crossings
- Rainwater harvesting
- Guide fencing
- Wildlife management interventions
- Speed regulation boards
- Warning signages
सरकारी जानकारी के अनुसार, वन्यजीवों को निर्धारित crossing structures की ओर निर्देशित करने और highway पर wildlife–vehicle conflict की संभावना कम करने के लिए 300 किलोमीटर से अधिक National Highway alignments पर guide fencing और noise barriers उपलब्ध कराए गए हैं।
Camera Trapping से होगी Wildlife Movement की निगरानी
NHAI ने wildlife movement को समझने और mitigation measures की प्रभावशीलता का समय-समय पर आकलन करने के लिए monitoring mechanisms का भी उल्लेख किया है।
PIB के अनुसार, इनमें camera trapping शामिल है। इसके अलावा wildlife–vehicle collision hotspots की पहचान कर वहां speed-regulation boards और appropriate signage जैसे उपाय किए जाते हैं।
हाईवे निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन
NHAI के दस्तावेज में infrastructure development और ecological conservation के बीच संतुलन पर जोर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, wildlife mitigation measures को National Highway development के अलग-अलग चरणों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य infrastructure expansion के साथ biodiversity conservation और statutory environmental compliance requirements को भी ध्यान में रखना है।
NHAI ने यह भी कहा है कि conservation community और highway infrastructure से जुड़ी agencies के बीच सहयोग इस approach का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब?
सरकार द्वारा जारी जानकारी का सीधा मतलब यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में अब केवल सड़क और यातायात क्षमता पर ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों की आवाजाही और habitat connectivity से जुड़े पहलुओं पर भी mitigation planning की जा रही है।
Underpasses, overpasses, culverts, canopy crossings, fencing और signage जैसे उपायों का उद्देश्य वन्यजीवों और highway users दोनों के लिए संभावित टकराव के जोखिम को कम करना है। हालांकि, इस PIB release में इन उपायों के कारण wildlife–vehicle collisions में कितनी प्रतिशत कमी आई है, इसका कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए ऐसा कोई specific improvement percentage इस खबर में नहीं जोड़ा गया है।
NHAI का Wildlife Mitigation Document कहां मिलेगा?
NHAI ने इस पूरी framework और हालिया initiatives को दस्तावेज में विस्तार से दर्ज किया है। आधिकारिक दस्तावेज NHAI की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
NHAI Wildlife Mitigation Measures & Structures – Official PDF
निष्कर्ष
NHAI द्वारा जारी ‘Wildlife Mitigation Measures & Structures’ document राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में wildlife conservation से जुड़े structural और non-structural उपायों का framework प्रस्तुत करता है। सरकार के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में करीब ₹19,700 करोड़ wildlife mitigation infrastructure और संबंधित environmental safeguards पर निवेश किया गया है तथा 2,150 से अधिक wildlife mitigation structures बनाए गए हैं या प्रस्तावित हैं।
यह पहल highway connectivity के साथ wildlife movement, biodiversity conservation और environmental safeguards को planning process में शामिल करने की दिशा में NHAI के approach को दर्शाती है।
























