विकसित भारत के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएगा उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने दो महत्वपूर्ण पहल की हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ किया और ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ दस्तावेज का विमोचन किया। सरकार के अनुसार, इन पहलों का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना और प्रदेश के दीर्घकालिक विकास को नई दिशा देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता का आकलन इस बात से होता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ कितने पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव और बार-बार दस्तावेज जमा करने जैसी परेशानियों के कारण कई पात्र लोग योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। देवभूमि परिवार पोर्टल के जरिए इन समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
एक आईडी से मिलेगी परिवार की जानकारी
प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, देवभूमि परिवार पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के परिवारों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। पंजीकरण के बाद प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी दी जाएगी।
इस व्यवस्था से परिवार और उसके सदस्यों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का दावा है कि इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा तथा सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान और सेवाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया आसान बनेगी।
पोर्टल के माध्यम से योजनाओं की निगरानी, लाभार्थियों की जरूरतों का आकलन और सरकारी बजट एवं संसाधनों का बेहतर नियोजन भी किया जा सकेगा। इसके संचालन के लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी की व्यवस्था प्रस्तावित है।
2047 तक 28 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
कार्यक्रम में प्रस्तुत विकसित उत्तराखंड विजन-2047 के तहत प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्रमुख सचिव के अनुसार, इस विजन में करीब 440 संकेतकों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों की प्रगति का आकलन किया जाएगा।
सरकार ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने और प्रति व्यक्ति आय को करीब 20 लाख रुपये करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विजन दस्तावेज में कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। ऊर्जा क्षेत्र में स्थापित क्षमता को करीब 22 हजार मेगावाट और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
सड़क, रेल और पर्यटन विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उत्तराखंड में सड़क, रेल, हवाई संपर्क और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना को प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाएं बताया।
उन्होंने केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों, मानसखंड मंदिर माला मिशन तथा शीतकालीन यात्रा को भी पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के लिए अहम बताया।
महिलाओं और युवाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश, स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
अर्थव्यवस्था और रिवर्स पलायन में वृद्धि का दावा
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना से अधिक बढ़ चुकी है। पिछले एक वर्ष में प्रदेश की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत बढ़ोतरी और रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का विकास मॉडल प्रकृति के साथ प्रगति पर आधारित होना चाहिए। हिमालय, नदियों, जंगलों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदेश की महत्वपूर्ण पहचान बताते हुए उन्होंने विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।
आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है यह पोर्टल?
देवभूमि परिवार पोर्टल लागू होने के बाद परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और पात्रता की पहचान करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। परिवार की जानकारी एकीकृत होने से अलग-अलग विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम हो सकती है।
हालांकि, पोर्टल से वास्तविक लाभ कितना मिलेगा, यह इसकी कार्यप्रणाली, डेटा की शुद्धता, पात्रता के नियमों और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार ने इसे नागरिक सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार, प्रशासन और आम जनता की सामूहिक भागीदारी से उत्तराखंड विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और खजान दास, विधायक सविता कपूर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी एवं जिला स्तरीय अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।




















