सीएम धामी ने पेश किया ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट
गैरसैंण। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा सत्र के पहले दिन ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया। सरकार की ओर से प्रस्तुत बजट में किसानों से धान-गेहूं की खरीद, कुंभ मेला-2027 की तैयारियों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पेयजल, सड़क निर्माण, ऊर्जा, खेल और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है।
उपलब्ध बजट विवरण के अनुसार, उत्तराखंड के मूल बजट का आकार ₹1,11,703.21 करोड़ है। अनुपूरक बजट शामिल होने के बाद कुल बजट का आकार बढ़कर ₹1,19,547.39 करोड़ हो जाएगा। अनुपूरक बजट में ₹3,679.86 करोड़ राजस्व मद और ₹4,164.32 करोड़ पूंजीगत मद के लिए प्रस्तावित हैं। राजस्व मद में सरकारी योजनाओं और अन्य खर्चों से संबंधित प्रावधान शामिल होते हैं, जबकि पूंजीगत मद का उपयोग बुनियादी ढांचे और परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों में किया जा सकता है।
किसानों के लिए ₹1,100 करोड़ का प्रावधान
अनुपूरक बजट में कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए अन्नपूर्ति योजना के तहत ₹1,100 करोड़ रखे गए हैं।
इसके अलावा उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना (जायका) के लिए ₹70 करोड़, प्रधानमंत्री माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज योजना के लिए लगभग ₹35 करोड़ और दीन दयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए ₹20 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
गोसदन निर्माण के लिए करीब ₹9 करोड़ और नई मौन पालन नीति के लिए ₹1 करोड़ प्रस्तावित हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य कृषि, खाद्यान्न खरीद और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है।
कुंभ मेला-2027 के लिए करीब ₹290 करोड़
धार्मिक पर्यटन और आगामी कुंभ मेला-2027 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मदों में कुल मिलाकर करीब ₹290 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर परियोजना के कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के लिए ₹30 करोड़ का पूंजीगत प्रावधान रखा गया है। इन योजनाओं से संबंधित धनराशि का उपयोग निर्धारित कार्यों के लिए किया जाना है। वास्तविक प्रगति संबंधित विभागों की कार्ययोजना और धनराशि जारी होने पर निर्भर करेगी।
पेयजल और शहरी विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट
पेयजल और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी अनुपूरक बजट में धनराशि रखी गई है।
– गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए ₹122 करोड़।
– पेयजल विभाग की केएफडब्ल्यू परियोजना के लिए करीब ₹110 करोड़।
– जल जीवन मिशन के तहत ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए ₹300 करोड़।
– शहरी विकास विभाग की एडीबी पोषित योजनाओं के लिए करीब ₹100 करोड़।
इन प्रावधानों का संबंध पेयजल परियोजनाओं, शहरी विकास और संबंधित कार्यों के वित्तपोषण से है। इनका आम लोगों को मिलने वाला लाभ परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल कॉलेजों के लिए धनराशि
स्वास्थ्य क्षेत्र में अटल आयुष्मान योजना के तहत पात्र लोगों को ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं, सरकारी कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जुड़ी गोल्डन कार्ड योजना के लिए ₹125 करोड़ रखे गए हैं।
पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों के साथ नर्सिंग कॉलेजों के लिए पूंजीगत मद में करीब ₹160 करोड़ का प्रावधान बताया गया है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य स्वास्थ्य योजनाओं और चिकित्सा संस्थानों से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराना है। हालांकि, इससे सेवाओं में कितना सुधार होगा, यह संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन और धनराशि के उपयोग पर निर्भर करेगा।
ऊर्जा, पुलिस और न्यायिक ढांचे के लिए भी प्रावधान
बजट विवरण के अनुसार, खुरपिया फार्म परियोजना सहित ऊर्जा वितरण व्यवस्था के लिए करीब ₹270 करोड़ रखे गए हैं।
इसके अलावा पुलिस विभाग के आवासीय और अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए ₹55 करोड़, न्यायिक बुनियादी ढांचे के लिए ₹22 करोड़ तथा जोशीमठ सहित अन्य स्थानों पर भू-धंसाव से संबंधित कार्यों के लिए ₹48 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
नए स्टेट डेटा सेंटर के निर्माण के लिए भी ₹40 करोड़ प्रस्तावित हैं।
डिजिटल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर जोर
शिक्षा क्षेत्र में विद्यालयी और उच्च शिक्षा के अंतर्गत डिजिटल लर्निंग के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के तहत नीट, जेईई और क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग पर ₹5 करोड़ रखे गए हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य शिक्षा संबंधी योजनाओं और विद्यार्थियों की तैयारी के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए बजट
खेल क्षेत्र में भी कई मदों के लिए धनराशि प्रस्तावित की गई है।
– विशेष प्रशिक्षण शिविरों के लिए ₹8 करोड़।
– ओपन जिम की स्थापना के लिए ₹5 करोड़।
– खिलाड़ियों की छात्रवृत्ति के लिए करीब ₹5.50 करोड़।
– विद्यालयी शिक्षा में छात्रवृत्ति के लिए करीब ₹4 करोड़।
– खेल विश्वविद्यालय के लिए लगभग ₹35 करोड़।
– अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार देने के लिए ₹15 करोड़।
– चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए ₹10 करोड़।
इन प्रावधानों के माध्यम से खेल सुविधाओं, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों से जुड़ी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था की गई है।
पेंशन, आंगनबाड़ी और भोजन माताओं के लिए प्रावधान
सामाजिक कल्याण के अंतर्गत कल्याणकारी पेंशन योजनाओं के लिए करीब ₹93 करोड़ और निराश्रित विधवा पेंशन के लिए लगभग ₹27 करोड़ रखे गए हैं।
भोजन माताओं के मानदेय के लिए ₹20 करोड़, सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत करीब ₹60 करोड़ और मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए लगभग ₹2 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
इन योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त बजट की व्यवस्था की गई है। हालांकि, लाभ की वास्तविक स्थिति संबंधित योजना के नियमों, पात्रता और भुगतान प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
स्थानीय निकायों को मिलने वाली हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव
ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के वित्तपोषण के संबंध में छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए ₹721 करोड़ का प्रावधान बताया गया है।
यदि यह व्यवस्था प्रस्ताव के अनुसार लागू होती है, तो स्थानीय निकायों को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों में वृद्धि हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
सड़क और औद्योगिक विकास के लिए भी धनराशि
लोक निर्माण विभाग के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की सड़कों के रखरखाव के लिए ₹31 करोड़ तथा ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत पीएमजीएसवाई के लिए ₹30 करोड़ रखे गए हैं।
इसके अलावा मेगा इंडस्ट्रियल नीति के तहत अनुदान योजना के लिए ₹12 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
₹7,844.18 करोड़ के अनुपूरक बजट में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क, सामाजिक सुरक्षा और कुंभ मेला-2027 की तैयारियों सहित कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। किसानों से खाद्यान्न खरीद, स्वास्थ्य योजनाओं के वित्तपोषण, शिक्षा में डिजिटल सुविधाओं और पेंशन जैसी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
हालांकि, अनुपूरक बजट पेश होना अपने आप में यह सुनिश्चित नहीं करता कि पूरी धनराशि तत्काल खर्च हो जाएगी या सभी योजनाओं का लाभ तुरंत मिलने लगेगा। इसके लिए बजट की विधायी मंजूरी, विभागों को धनराशि जारी होने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।




















