हरिद्वार। रानीपुर कोतवाली क्षेत्र की टिहरी विस्थापित कॉलोनी में बंद मकानों में हुई चोरी की दो घटनाओं का पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी के जेवरात बेचकर प्राप्त करीब पांच लाख रुपये की नकदी, महत्वपूर्ण दस्तावेज और वारदात में इस्तेमाल टेंपो बरामद किया है। पूछताछ में आरोपियों ने बंद घरों की रेकी करने के बाद चोरी की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की है।
पुलिस के अनुसार, चार अगस्त को टिहरी विस्थापित कॉलोनी निवासी दो लोगों ने रानीपुर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि 29 जुलाई की रात अज्ञात चोरों ने उनके और पड़ोस के एक अन्य मकान के ताले तोड़कर जेवरात और नकदी चोरी कर ली। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
हरिद्वार जांच के दौरान पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में वारदात के दौरान एक टेंपो संदिग्ध रूप से आता-जाता दिखाई दिया। पुलिस ने वाहन की पहचान और आरोपियों की तलाश के लिए स्थानीय पुलिस के साथ सीआईयू की टीम को भी लगाया। इसके बाद हरिद्वार समेत आसपास के जिलों में संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई।
इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि संदिग्ध टेंपो बीएचईएल क्षेत्र की ओर आ रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने बीएचईएल स्टेडियम के पास सुरेश्वरी देवी मंदिर जाने वाले तिराहे पर चेकिंग शुरू की। यहां नीले रंग के टेंपो के साथ पुलिस ने अक्षय उर्फ गोलू को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से मृतक राजेंद्र पाल के नाम से जारी पुलिस पहचान संबंधी कार्ड बरामद हुआ। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल टेंपो को भी कब्जे में ले लिया।
पूछताछ में अक्षय ने पुलिस को बताया कि उसने सोनू सैनी और सोनू शर्मा के साथ मिलकर 29 जुलाई को टिहरी विस्थापित कॉलोनी में दो बंद मकानों के ता
ले तोड़कर चोरी की थी। उसके अनुसार, चोरी के बाद दोनों साथी जेवरात बेचने के लिए बिजनौर चले गए थे और बाद में अपना हिस्सा लेने के लिए हरिद्वार लौटे थे।
हरिद्वार पुलिस ने अक्षय की निशानदेही पर रावली महदूद क्षेत्र में डैंसो चौक के पास स्थित एक मकान पर दबिश देकर सोनू सैनी और सोनू शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों के कब्जे से करीब पांच
लाख रुपये नकद तथा राजेंद्र पाल के नाम से संबंधित पैन कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए गए।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर चोरी की घटनाओं से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।





















