देहरादून। राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) में अध्ययनरत विद्यार्थियों का आंदोलन अब तेज हो गया है। विभिन्न लंबित मांगों के समाधान में हो रही देरी से नाराज छात्रों ने संस्थान परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासनिक भवन के बाहर विरोध दर्ज कराया और समस्याओं के शीघ्र एवं स्थायी समाधान की मांग की।
शुक्रवार को बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित विद्यार्थी कक्षाओं से बाहर निकलकर प्राचार्य कार्यालय और निदेशक कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने संस्थान प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए कहा कि लंबे समय से उठाए जा रहे मुद्दों पर अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध समाधान की आवश्यकता है।
देहरादून। विद्यार्थियों के अनुसार, संस्थान में कई प्रशासनिक और शैक्षणिक समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। उनका कहना है कि पिछले लगभग चार वर्षों से स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण निर्णय लंबित हैं, जिसका सीधा प्रभाव संस्थान की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों की सुविधाओं पर पड़ रहा है। छात्रों ने नियमित निदेशक की शीघ्र नियुक्ति की मांग करते हुए कहा कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी।
आंदोलन के बाद संस्थान प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए अधिकारियों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। साथ ही छात्र प्रतिनिधियों के साथ भी वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान तलाशने की पहल की जा रही है।
विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता योजना को पुनः प्रारंभ करने, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध कराने तथा शिक्षा, छात्रावास, भोजन, खेलकूद और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। उनका कहना है कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए डिजिटल संसाधन शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं और तकनीकी सुविधाओं की कमी उनकी पढ़ाई को प्रभावित करती है।
देहरादून। संस्थान के निदेशक प्रदीप अनिरुद्ध ने ऑनलाइन माध्यम से छात्र प्रतिनिधियों से संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने संस्थान पहुंचकर विद्यार्थियों एवं प्रबंधन के साथ बैठक करने और विभिन्न मांगों पर सकारात्मक समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
संस्थान प्रशासन के अनुसार, कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध कराने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है तथा वितरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। हालांकि छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें केवल लैपटॉप तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्थान की समग्र शैक्षणिक और आवासीय व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है।
फिलहाल संस्थान प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता पर सभी की निगाहें टिकी हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।





















